Baba Neem Karoli Maharaj

नीम करौली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। यूपी के अकबरपुर गांव में जन्मे बाबा को महाराज जी के नाम से भी पुकारा जाता है। देश-विदेश में बाबा के हजारों भक्त हैं। इनमें अध्यात्म गुरु राम दास, योगी भगवान दास के अलावा ऐपल कंपनी के सीईओ स्टीव जॉब्स भी शामिल हैं। स्टीव बाबा से मिलने खास तौर पर भारत आए थे। भारत आने पर उन्हें पता चला कि बाबा की मौत काफी पहले (11 सितंबर 1973) हो चुकी है। बाबा के दर्जनों मंदिर देश-विदेश में हैं। कथित चमत्कारिक शक्तियों की वजह से बाबा मशहूर हैं। बात बहुत पुरानी है. अपनी मस्ती में एक युवा योगी लक्ष्मण दास हाथ में चिमटा और कमंडल लिये फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) से टूण्डला जा रही रेल के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में चढ़ गए. गाड़ी कुछ दूर ही चली थी कि एक ऐंग्लो इण्डियन टिकट निरीक्षक वहां आया. उसने बहुत कम कपड़े पहने, अस्त-व्यस्त बाल वाले बिना टिकट योगी को देखा, तो क्रोधित होकर अण्ट-सण्ट बकने लगा. योगी अपनी मस्ती में चूर था. अतः वह चुप रहा. कुछ देर बाद गाड़ी नीब करौरी नामक छोटे स्टेशन पर रूकी. टिकट निरीक्षक ने उसे अपमानित करते हुए उतार दिया. योगी ने वहीं अपना चिमटा गाड़ दिया और शांत भाव से बैठ गया. गार्ड ने झण्डी हिलाई, पर गाड़ी बढ़ी ही नहीं. पूरी भाप देने पर पहिये अपने स्थान पर ही घूम गये. इज्जन की जांच की गयी, तो वह एकदम ठीक था. अब तो चालक, गार्ड और टिकट निरीक्षक के माथे पर पसीना पर आ गया. कुछ यात्रियों ने टिकट निरीक्षक से कहा कि बाबा को चढ़ा लो, तब शायद गाड़ी चल पड़े. मरता क्या न करता, उसने बाबा से क्षमा मांगी और गाड़ी में बैठने का अनुरोध किया. बाबा बोले- चलो तुम कहते हो, तो बैठ जाते हैं. उनके बैठते ही गाड़ी चल दी. इस घटना से वह योगी और नीब करौरी गांव प्रसिद्ध हो गया. बाबा आगे चलकर कई साल तक उस गांव में रहे और फिर नीम करौरी बाबा या बाबा नीम करौली के नाम से विख्यात हुए. बाबा ने अपना मुख्य आश्रम नैनीताल (उत्तराखण्ड) की सुरम्य घाटी में कैंची ग्राम में बनाया. यहां बनी रामकुटी में वे प्रायः एक काला कम्बल ओढ़े भक्तों से मिलते थे. बाबा ने देश भर में 12 प्रमुख मंदिर बनवाये. उनके देहांत के बाद भी भक्तों ने 9 मंदिर बनवाये हैं. इनमें मुख्यतः हनुमान जी के प्रतिमा है. बाबा चमत्कारी पुरुष थे. अचानक गायब या प्रकट होना, भक्तों की कठिनाई को भांप कर उसे समय से पहले ही ठीक कर देना, इच्छानुसार शरीर को मोटा या पतला करना, आद कई चमत्कारों की चर्चा उनके भक्त करते हैं. बाबा का प्रभाव इतना था कि जब वे कहीं मंदिर स्थापना या भंडारे आदि का आयोजन करते थे, तो न जाने कहां से दान और सहयोग देने वाले उमड़ पड़ते थे और वह कार्य भली भांति सम्पन्न हो जाता था. जब बाबा को लगा कि उन्हें शरीर छोड़ देना चाहिए, तो उन्होंने भक्तों को इसका संकेत कर दिया. इतना ही नहीं उन्होंने अपने समाधि स्थल का भी चयन कर लिया था. 9 सितम्बर, 1973 को वे आगरा के लिए चले. वे एक कापी पर हर दिन रामनाम लिखते थे. जाते समय उन्होंने वह कापी आश्रम की प्रमुख श्रीमां को सौंप दी और कहा कि अब तुम ही इसमें लिखना. उन्होंने अपना थर्मस भी रेल से बाहर फेंक दिया. गंगाजली यह कह कर रिक्शा वाले को दे दी कि किसी वस्तु से मोह नहीं करना चाहिए. आगरा से बाबा मथुरा की गाड़ी में बैठे. मथुरा उतरते ही वे अचेत हो गये. लोगों ने शीघ्रता से उन्हें रामकृष्ण मिशन अस्पताल, वृन्दावन में पहुंचाया, जहां 10 सितम्बर, 1973 (अनन्त चतुर्दशी) की रात्रि में उन्होंने देह त्याग दी. बाबा का मूल नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था. उनका जन्म ग्राम अकबरपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था. उनकी समाधि वृंदावन में तो है ही, पर कैंची, नीब करौरी, वीरापुरम (चेन्नई) और लखनऊ में भी उनके अस्थि कलशों को भू समाधि दी गयी. उनके लाखों देशी एवं विदेशी भक्त हर दिन इन मंदिरों एवं समाधि स्थलों पर जाकर बाबा का अदृश्य आशीर्वाद ग्रहण करते हैं. उत्तराखंड के नैनीताल से 65 किलोमीटर दूर पंतनगर में नीम करौली नाम के एक संन्यासी का आश्रम है. बाबा का 1973 में निधन हो गया था. लेकिन आश्रम में अब भी विदेशी आते रहते हैं. यह आश्रम फिलहाल एक ट्रस्ट चलाता है. बताया जाता है कि सबसे ज्यादा अमेरिकी ही इस आश्रम में आते हैं. आश्रम पहाड़ी इलाके में देवदार के पेड़ों के बीच है. यहां पांच देवी-देवताओं के मंदिर हैं. इनमें हनुमान जी का भी एक मंदिर है. भक्तों का मानना है कि बाबा खुद हनुमान जी के अवतार थे. बाबा नीब किरोडी आश्रम कुछ हाई प्रोफाइल अमेरिकी लोगों के लिए काम करता रहा है. जूलिया रोबर्ट्स, आध्यात्मिक गुरू रामदास, स्टीव जॉब्स और मार्क जकरबर्ग ये कुछ बडी शख्यितों में से कुछ नाम हैं जिन्हें एक आम से दिखने वाले, कंबल ओढकर रहने वाले एक बाबा की चुंबकीय शख्यित ने बदल दिया. बाबा नीब किरोडी ने ही इन्हें कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित किया. बाबा से प्रेरणा लेने वाली हस्तियों में बेहद लोकप्रिय किताब इमोशन इंटेलिजेंस के लेखक डेनियल गोलमैन, पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि, बिडला ग्रुप के जुगलकिशोर बिडला और यहां तक कि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे.

कैंची धाम - बिगड़ी तकदीर बनाने वाला हनुमान मंदिर

नैनीताल के कैंची धाम स्थित हनुमान मंदिर, आज किस्मत बनाने वाले करोली बाबा के नाम से विश्व भर में विख्यात है। नीम करोली बाबा को हनुमान का एक रूप भी बताया जाता है। बाबा के भक्तों में एप्पल कंपनी के मालिक स्टीव जॉब्स भी आते थे। आज फेसबुक प्रमुख मार्क जुकरबर्ग और हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स बाबा की भक्त हैं। वर्तमान में बाबा तो समाधी ले चुके हैं किन्तु कहते हैं कि हनुमान जी का यह मंदिर बिगड़ी तकदीर बना देता है। देश-विदेश समेत हज़ारों लोग यहाँ अपनी बिगड़ी तक़दीर को बनवाने आते हैं। 27 सितंबर 2015 को जब भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी फेसबुक के मुख्यालय में थे और बातों का दौर चल रहा था तो जुकरबर्ग ने कहा था कि जब वे इस कन्फ्यूजन में थे कि फेसबुक को बेचा जाए या नहीं, तब एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने इन्हें भारत के एक मंदिर में जाने की सलाह दी थी। वहीं से इन्हें कंपनी के लिए नया मिशन मिला। जुकरबर्ग ने बताया था कि वे एक महीना भारत में रहे। इस दौरान उस मंदिर में भी गए थे। वह मंदिर कैंची धाम हनुमान मंदिर ही है जहां एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने फेसबुक प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को जाने के लिए कहा था। मंदिर को आज नीम करोली बाबा का कैंची धाम नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के कुछ ट्रस्टी लोग बताते हैं कि " गूगल के पूर्व डायरेक्टर लैरी ब्रिलियंट ने आश्रम में फ़ोन कर यह जानकारी दी थी कि मार्क जुकरबर्ग नाम का एक लड़का कैंची धाम आश्रम में आ रहा है और वह कुछ दिन यहाँ रुकेगा।" और मार्क जब यहाँ आये थे तो उनके पास मात्र एक पुस्तक थी। जुकरबर्ग आए तो एक दिन के लिए थे, लेकिन मौसम खराब हो जाने के कारण वह यहाँ दो दिन रुके थे। 27 सितंबर को सैन होसे में मोदी एप्पल के वर्तमान सीईओ टिम कुक से मिले थे। कुक ने मोदी जी को बताया था कि, "हमारे फाउंडर स्टीव जॉब्स इन्सपिरेशन के लिए भारत गए थे। जॉब्स 1974 में आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में अपने कुछ दोस्तों के साथ नीम करौली बाबा से मिलने भारत आए थे। तब तक बाबा का निधन हो चुका था। लेकिन जॉब्स कुछ दिन आश्रम में ही रुके थे।" मंदिर अधिकारियों का कहना है कि जूलिया रॉबर्ट्स, डॉक्टर रिचर्ड एल्पेर्ट जो ड्रग एलएसडी के प्रभाव पर रिसर्च करते हैं और मशहूर लेखक डेनियल भी यहां आ चुके हैं। नीम करोली बाबा की महिमा न्यारी है। भक्तजनों की माने तो बाबा की कृपा से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। यही कारण है कि बाबा के बनाए सारे मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। नीम करोली धाम को बनाने के संबंध में कई रोचक कथायें प्रचलित हैं। बताया जाता है कि 1962 में जब बाबा ने यहां की जमीन पर अपने कदम रखे थे तो जनमानस को अपने चमत्कारों से आश्चर्यचकित कर दिया था। एक कथा के अनुसार के अनुसार 15 जून को आयोजित, विशाल भंडारे के दौरान घी कम पड़ गया था। तब बाबा के आदेश पर पास की नदी का पानी कनस्तरों में भरकर प्रसाद बनाया जाने लगा। प्रसाद में डालते ही पानी अपने आप आप घी में बदल गया। इस चमत्कार से भक्त जन नतमस्तक हो गए। तभी से उनकी आस्था और विश्वास नीम करोली बाबा के प्रति बना है। नीम करोली बाबा का यह आश्रम आधुनिक जमाने का धाम है। यहां मुख्य तौर पर भगवान हनुमान जी की पूजा होती है। इस जगह का नाम कैची यहां सड़क पर दो बड़े जबरदस्त हेयरपिन बैंड (मोड़ के नाम पर पड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार सन 1964 में आगरा के पास फिरोजाबाद के गांव अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा (असली नाम यहाँ तपस्या करने आए थे। उन्हीं के प्रयासों से इस मंदिर का उद्धार हुआ था। बताया जाता है की फर्रूखाबाद के गांव नीम करौली में उन्होंने कठिन तपस्य़ा की थी जिस कारण वे बाबा नीम करौली कहलाने लगे। कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा/रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पर स्थित है। 24 मई 1962 को बाबा ने पावन चरण उस भूमि पर रखे, जहां वर्तमान में कैंची मंदिर स्थित है। 15 जून 1964 को मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति की प्रतिष्ठा की गई और तभी से 15 जून को प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाता है। मंदिर चारों ओर से ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से घिरा हुआ है और मंदिर में हनुमान जी के अलावा भगवान राम एवं सीता माता तथा देवी दुर्गा जी के भी छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं। किन्तु कैंची धाम मुख्य रूप से बाबा नीम करौली और हनुमान जी की महिमा के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आने पर व्यक्ति अपनी सभी समस्याओं के हल प्राप्त कर सकता है।

जीवन परिचय

बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में एक ब्रहाम्ण परिवार में हुआ था। उनके पिताजी का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा था। माना जाता है कि बाबा ने लगभग सन् 1900 के आसपास जन्म लिया था, और उनका जन्म से ही लक्ष्मी नारायण नाम रख दिया था। महज 11 वर्ष की उम्र में ही बाबा की शादी करा दी गई थी। बाद में उन्होंने अपने घर को छोड़ दिया था। एक दिन उनके पिताजी ने उन्हें नीम करौली नामक ग्राम के आसपास देख लिया था । यह नीम करौली ग्रामखिमसपुर , फर्रूखाबाद के पास ही था। बाबा को फिर आगे इसी नाम से जाना जाने लगा। माना जाता है कि लगभग 17 वर्ष की उम्र में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी। नीम करौली बाबा ने 1958 में अपने घर को त्याग दिया था , यह वह समय था जब उनके पास एक 11 साल की कन्या थी और एक छोटा सा बच्चा भी था। गृह-त्याग के बाद बाबा पुरू उत्तर भारत में साधू की भाँति विचरण करने लगे थे। इस समय के दौरान उन्हें लक्ष्मण दास, हांडी वाला बाबा , और तिकोनिया वाला बाबा सहित कई नामों से जाना जाता था। जब उन्होंने गुजरात के ववानिया मोरबी में तप्सया प्रारंभ की तब वहाँ उन्हें लोग तलईया बाबा के नाम से जानते थे। वृंदावन में स्थानीय निवासियों ने बाबा को चम्तकारी बाबा के नाम से संबोधित किया। उनके जीवन काल में दो बड़े आश्रमों का निर्माण हुआ था, पहला वृदांवन में और दूसरा कैंची में, जहाँ बाबा गर्मियों के महीनों को बिताते थे । उनके समय में 100 से ज्यादा मंदिरों का निर्माण उनके नाम से हुआ था। नीम करौली बाबा हनुमानजी के बहुत बड़े भक्त थे। उन्हें अपने जीवन में लगभग 108 हनुमान मंदिर बनवाए थे। वर्तमान में उनके हिंदुस्तान समेत अमरीका के टैक्सास में भी मंदिर हैं। कैंची आश्रम जहाँ बाबा अपने जीवन के अंतिम दशक में रहे थे उसका निर्माण 1964 में हुआ था। इसकी खास बात थी कि इस आश्रम में हनुमान जी का भी मंदिर बनावाया गया था। बाबा को वर्ष 1960 के दशक में अन्तरराष्ट्रीय पहचान मिली। उस समय उनके एक अमरीकी भक्त बाबा राम दास ने एक किताब लिखी जिसमें उनका उल्लेख किया गया था। इसके बाद से पश्चिमी देशों से लोग उनके दर्शन तथा आर्शीवाद लेने के लिए आने लगे। बाबा ने अपने शरीर को 11 सिंतबर , 1973 को छोड़ दिया था और अपने भगवान हनुमान जी के सानिध्य में चले गये। बाबा हम सभी के लिए प्रेरणा के स्रोत थे, माना जाये तो कलियुग में हनुमान जी ही नीम करौली बाबा के नाम से जाने गये थे। समये का साथ-साथ इन वर्षों में नैनीताल – अल्मोड़ा सड़क पर नैनीताल से 17 किमी स्थित मंदिर अब लोगों के महत्वपुर्ण तीर्थ बन गया है। 15 जून को जब कैंची धाम का मेला होता है तब मंदिर में लाखों श्रद्धालु आतें हैं और प्रसाद पातें हैं।